Saturday, April 23, 2011

कपाल पीठ: गोठ मांगलोद.... दधिमन्थन से पैदा हुई दधिमती माता: दूध से होता है जिनका अभिषेक.


हमारी पुण्य भूमि मातृभूमि जो भारत भूमि के नाम से जानी जाती हेै, इसमें सभी तीर्थ स्थान ऐसे हैं जहां जाने से प्रत्येक मनुष्य का तन-मन पवित्र हो उठता हैऔर नवजीवन का संचार होता है। पुराणों में 51 महाशक्ति पीठ व 26 उप पीठों का वर्णन मिलता है, इनको शक्ति पीठ या सिद्ध पीठ भी कहते हैं। इनमें से एक दधिमथी पीठ है, जो कपाल पीठ के नाम से भी जानी जाती है। सम्पूर्ण कामनाओं को पूर्ण करने वाली त्रिनेत्रा भगवती, जो हाथों में चमकीला चक्र, तलवार, धनुष-बाण, अभय मुद्रा, कमल और त्रिशूल धारण किए हुए हैं, जो मोतियों के हार और कुण्डल से युक्त हैं, वह सिंह-वाहिनी वर देने वाली सर्वोत्कृष्टा पूजने योग्य दधिमथी माता सदा मंगल करे।
दधिर्भक्त जनान धात्री मथी तदरिमाथिनी।
देवी दधिमथी नाम धन्वदेशे विराजते।।
देवी का प्राकट्य, मंदिर की स्थिति व निर्माण का वर्णन
दधिमथी का मंदिर पुष्कर अजमेर के उत्तर में 32 कोस पर स्थित है, जो नागौर जिले की जायल तहसील मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर गोठ व मांगलोद गांवों के बीच है।
त्रेता युग में अयोध्यापति राजा मान्धाता ने यहां एक सात्विक यज्ञ किया। उस समय माघ शुक्ला सप्तमी थी, देवी प्रकट हुई, जो दधिमथी के नाम से जानी जाती है। शिलालेख उके अनुसार इसका निर्माण गुप्त सम्वत् 289 को हुआ, जो करीब 1300 वर्षों पूर्व मंदिर शिखर का निर्माण हुआ। सम्वत 608 में 14 दाधीच ब्राह्मणों द्वारा 2024 तत्कालीन स्वर्ण-मुद्राओं से इसका गर्भग1ह व 38 स्तम्भों का निर्माण हुआ।
इतिहास-विशेषज्ञों व पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर को लगभग 2000 वर्ष प्राचीन माना है। 1908 के शिलालेख के अनुसार दाधीच-कुलभूषण सिद्व-ब्रह्मचारी बुढादेवल निवासी श्री विष्णुदास जी महाराज की आज्ञा से उदयपुर राजा स्वरूपसिंह जी ने चौक व तिबारे, दरवाजे, यात्री-निवास, बावड़ी, मंदिर आदि का निर्माण करवाया।
देवी के वर्तमान मंदिर की मूर्ति के बारे में कहते हैं कि जब देवी प्रकट हो रही थी, तभी वहां ग्वाला गाय चरा रहा था, जमीन के फटने से वहां गर्जना हुई। उसी के साथ देवी का कपाल बाहर निकला, गाएं भागने लगी तब ग्वाला ने कहा- माता ढबजा। उसके कहने से भगवती का कपाल ही बाहर आया। उस समय गायों के दूध से उसका अभिषेक किया गया। आज भी पूरे भारत में यह दधिमथी माता का एक ही मंदिर है, जहां दूध से अभिषेक होता है।
पूजा, उत्सव और मेले
मंदिर के चौक में से शिव परिवार व हनुमान जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर का शिखर बहुत ऊंचा है तथा यहां अधर-खम्भ की महिमा है। जिस दिन ये दोनो पाट बराबर चिपक जाएंगे, उस दिन प्रलय की स्थिति होगी। गर्भगृह में विभिन्न प्रकार की मूर्तियां लगी हुई है। यहां प्रत्येक नवरात्रों में चैत्र व आसोज में मेला लगता है, जो पूरे नौ दिनो तक चलता है। इसमें पूरे भारत-वर्ष के दाधीच बन्धुओं के अलावा सभी वर्गों के लोग आकर मां के दर्शन करते हैं। नवरात्रों के अलावा कार्तिक सुदी अष्टमी, गोपाष्टमी को अन्नकूट महोत्सव व माघ सुदी सप्तमी को प्राकट्य दिवस मनाया जाता है। वर्ष भर दर्शनार्थी आते हैं।
इस मंदिर की सेवा-पूजा पहले दाधीच ब्राह्मण करते थे, लेकिन कुछ समय बाद पास के गांव दुस्ताऊ के पाराशर ब्राह्मणों को बारी-बारी से सेवा-पूजा के लिए अधिकृत किया, जिसका उनको मंदिर समिति की ओर से पारिश्रमिक दिया जाता है। मंदिर की व्यवस्था हेतु जागीरदारों द्वारा जमीन दी गई, जिसके लगान के रूपये माताजी के मंदिर को मिलते हैं। यहां आस-पास जिप्सम निकलती है, उसके लगान के रूपये भी माताजी के मंदिर को मिलते थे, जो आजादी मिलने के बाद खनिज विभाग ने लगान बंद कर दिया।
मंदिर-स्थल की व्यवस्थाएं और आवागमन
यात्रियों के ठहरने के लिए यहां कमरे आदि का निर्माण हुआ है, पास में दधिमथी सेवायतन नाम से धर्मशाला भी बनाई गई है। मंदिर का जीर्णोद्धार करार्य चल रहा है, उसमें निज मंदिर का जीर्णोद्धार पूरा हुआ है। उसमें करीब एक करोड़ रूपये खर्च हुए हैं। यह खर्च अधिकांश दाधीच ब्राह्मणों ने मिलकर किया है। अन्य कार्य हेतु भारत सरकार व राजस्थान सरकार के पुरातत्व विभाग के सहयोग से किया जायेगा। यहां पिछले कई वर्षों से वेद विद्यालय भी चल रहा है, जिसमें ब्राह्मण वर्ग के बालक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसका संचालन आचार्य श्री किशोर जी व्यास वेद प्रतिष्ठान पूना द्वारा किया जा रहा है।
मंदिर में पहुंचने के लिए विभिन्न स्थानों से रेल, बस, टैक्सी आदि से आसानी से पहुंचा जा सकता है। जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर,दिल्ली, नागौर से डेगाना, छोटी खाटु आदि से रेल द्वारा और उसके बाद टेक्सी या बस द्वारा पहुंचा जा सकता है।
मंदिर की सम्पूर्ण व्यवस्था मंदिर प्रन्यास व अखिल भारतीय दाधीच ब्राह्मण महासभा द्वारा की जाती है।
दघिमती माता के बारे में पौराणिक कथा
श्री दुर्गाशप्तशती मार्क ण्डेय पुराण का ही एक प्रमुख अंश है। इसमें देवी भगवती दुर्गा की कथा विस्तृत रूप में वर्णित है। इसमें देवी ने कहा है कि जब जब संसार में दानवी बाधा उपस्थित होगी, अत्याचार बढेगा, धर्म की हानि होगी, हिंसा का प्रभाव बढेगा, तब-तब साधु-संतों की रखा, दुष्टों का संहार, वेदों का संरक्षण करने के लिए मैं प्रत्येक युग में ईश्वरीय शक्ति का अवतार लूंगी।
इत्थ यदा यदा बाधा दानवी स्था भविष्यति।
तदा तदावतीर्या हं करिष्याम्यरि संक्षयम्।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थितो।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
प्राचीनकाल में महा-बलवान देवता राक्षसों से अमृत लेने के लिए समुद्र-मंथन में असमर्थ हुए, तब महामाया भगवती की प्रार्थना की। तभी विराट् रूप में महामाया प्रकट हुई और उसी दिन से ब्रह्मा ने कहा कि दधिमन्थन के कारण तुम दधिमथी के नाम से प्रसिद्ध होगी। विष्णु तेरे पति, अथर्वा मुनि तेरे पिता, दधिची तेरे भाई व अथर्वा-पुत्र दधिची के पुत्रों की कुलदेवी होगी।
दधिमती का पूजन
दधिमती का पूजन दधिमती मंत्र के यंत्र द्वारा किया जाता है-
ऊँ ह्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौ: भगवते दधिमथ्यै नम:
भारतीय संस्कृति में शक्ति को देवी अर्हता प्राप्त है।
दधिमथ्यै नमस्तुभ्यं
नमस्यै लोकधारिणी।
विश्वेश्वारि नमस्तुभ्यं
नमोथर्वण कन्य के।।
लेखक:- देवदत्त शर्मा (छोटी खाटु वाले), जयपुर
सम्पर्क: 9414251739, 0141-2630466, 2615835

कपाल पीठ: गोठ मांगलोद--- दधिमन्थन से पैदा हुई दधिमती माता... दूध से होता है जिनका अभिषेक.


Sunday, March 6, 2011

सात साल बाद मिलेंगे 15 नए राष्ट्रीय राजमार्ग

लाडनूं को मिलेगा एक और हाई-वे
जयपुर। प्रदेश को करीब सात वर्ष बाद नए राष्ट्रीय राजमार्ग मिलने की उम्मीद बंधी है। राज्य सरकार ने पिछले दिनों 3515 किमी के 15 संशोघित प्रस्ताव केन्द्र को भेजे हैं। उम्मीद है कि इनमें से करीब 1500 किमी सड़कों को कुछ दिनों में राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित कर दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार नए राष्ट्रीय राजमार्गो के लिए केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री सी.पी.जोशी ने राज्य सरकार को कुछ सुझाव दिए थे।
जोशी चाहते थे कि आदिवासी, दूरदराज, रेगिस्तानी, माइनिंग, सीमेंट उत्पादन, नए पर्यटन क्षेत्रों को विशेष रूप से जोडऩे वाले प्रस्ताव भेजे जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने संशोघित प्रस्ताव बनाए। ये प्रस्ताव जल्द केन्द्रीय मंत्रिमण्डल के समूह के समक्ष रखे जाएंगे। इससे पहले सार्वजनिक निर्माण विभाग ने 2009 में करीब 2200 किमी सड़कों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने के प्रस्ताव भिजवाए थे। 2004 के बाद प्रदेश में एक भी नया राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित नहीं हुआ है।
लाडनूं को एक और हाई-वे
लाडनूं से राष्ट्रीय राजमार्ग सं. 65 पहले से ही गुजर रहा है। किशनगढ से हनुमानगढ मेगा हाई-वे भी लाडनूं होकर गुजर रहा है और अब लाडनूं होकर पाली जिले के भीम तक 253 किलोमीटर लम्बा राजमार्ग फिर राज्य सरकार ने प्रस्तावित किया है। लाडनूं से खाटू-डेगाना-मेड़ता सिटी-लाम्बिया-जैतारण-रायपुर होकर भीम जाने वाले इस मार्ग के निकलने से इस क्षेत्र को विकास के नए आयाम मिलेंगे। इसी प्रकार इस क्षेत्र के प्रसिद्ध सालासर धाम के नेछवा, सीकर, नीम का थाना होते हुए कोटपूतली, अलवर व भरतपुर से जुड़ जाने से भी काफी सुविधाएं मिल सकेंगी। इधर नागौर को भी जयपुर उसे वाया कुचामन होते हुए सीधा फलौदी से जोड़ा जा रहा है।
इनका कहना है
मैं और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत नए राष्ट्रीय राजमार्गो के लिए केंद्रीय मंत्री सी.पी.जोशी से मिले थे। इसके बाद नए प्रस्ताव भिजवाए हैं।
-प्रमोद जैन भाया,
सार्वजनिक निर्माण राज्यमंत्री
इस बार भेजे गए इन सड़कों के प्रस्ताव
1. बूंदी-बिजोलिया-लाडपुरा-भीलवाड़ा-गंगापुर-राजसमन्द
- 210 किमी
2. उनियारा-नैनवा-हिण्डौली-जहाजपुर-शाहपुरा-गुलाबपुरा
- 213 किमी
3. पाली-देसूरी-गोमती चौराहा-वाया नाडोल -93 किमी
4. उदयपुर-झाड़ोल-सोम-नालवा-दाईया-इदर
-108 किमी
5. लाम्बिया-रास-ब्यावर-बदनोर-आसींद-माण्डल -148 किमी
6. मथुरा-भरतपुर-बयाना-भाड़ोती-सवाई माधोपुर-इटावा-मांगरोल-बारां - 304 किमी
7. मावली-भांसोल-ओडन-खमनोर-हल्दीघाटी-कुंभलगढ़-चारभुजा -130 किमी
8. रतलाम-बांसवाड़ा-सागवाड़ा-डूंगरपुर-खेरवाड़ा-कोटड़ा-स्वरूपगंज - 310 किमी
9. जयपुर-जोबनेर-कुचामन-नागौर-फलौदी -366 किमी
10. लाडनूं-खाटू-डेगाना-मेड़ता सिटी-लाम्बिया-जैतारण-रायपुर-भीम - 253 किमी
11. मन्दसौर-प्रतापगढ़-धरियावाद-सलूम्बर-डूंगरपुर-बिच्छीवाड़ा -164 किमी
12. श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़-नोहर-भादरा-राजगढ़-झुंझुनू-उदयपुरवाटी-अजीतगढ़-शाहपुरा
- 474 किमी
13. रेवाड़ी- नारनौल-पचेरी-चिड़ावा-झुंझुनू-फतेहपुर
-123 किमी
14. भरतपुर-डीग-अलवर-बानसूर-कोटपूतली-नीम का थाना-सीकर-नेछवा-सालासर
- 301 किमी
15. कोसी-कामां-डीग-भरतपुर-रूपवास-धौलपुर -133 किमी
16. स्वरूपगंज-सिरोही-जालोर-सिवाणा-बालोतरा - 215 किमी

लाडनू बना तेरापंथ की raajdhaanee

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लाडनूं तेरापंथ की राजधानी घोषित

आचार्य महाश्रमण के तीन दिवसीय प्रवास ने बदली लाडनूं की फिजां

लाडनूं (कलम कला न्यूज)। तेरापंथ धर्मसंघ के 11 वें आचार्य महाश्रमण ने लाडनूं को तेरापंथ धर्मसंघ की राजधानी के रूप में घोषित किया है। इससे पूर्व नौंवें आचार्य गुरूदेव तुलसी ने लाडनूं को तेरापंथ का केन्द्र बनाने का भरसक प्रयास किया था, लेकिन वे इसे राजधानी के रूप में इतना खुला घोषित नहीं कर पाए थे। लाडनूं आचार्य तुलसी का जन्म-स्थान है और आचार्य तुलसी के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर लाडनूं को तेरापंथ का गढ घोषित किए जाने से लोगों को अपार हर्ष का अनुभव हुआ है। आचाय्र महाश्रमण के साथ युवाचार्य के रूप में महाश्रमण यहां से गए थे और उनके देवलोकगमन के बाद आचार्य के रूप में पदारोहण के पश्चात् पहली बार आचार्य महाश्रमण लाडनूं पधारे। लाडनूं वासियों ने पलक पांवड़े बिछाकर उनका स्वागत किया और उनके अल्पकाल के प्रवास का अधिकतम फायदा उठाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों की संरचना इस मौके पर की। जैनविश्वभारती का उन्होंने स्वयं घूमकर एकबार पूरा अवलोकन किया, वहां की एक-एक गतिविधि की जानकारी हासिल की। वे जैनविश्वभारती और उससे सम्बद्ध विश्वविद्यालय से काफी अभिभूत हुए। उन्हें आचार्य तुलसी की परिकल्पना में बहुत दम लगा। वे तुलसी के स्मारक पर भी गए। उन्हें लगा कि यह लाडनूं ही वह स्थान है, जहां तेरापंथ अपना विश्व स्तरीय स्वरूप धारण कर सकता है। उन्होंने अपने अभिनन्दन समारोह में कहा, अब तक सरदारशहर को तेरापंथ की राजधानी माना जाता रहा है, अब लाडनूं नगर राजधानी होगा, इसकी घोषणा करता हूं। लाडनूं के साथ तेरापंथ का बहुत बड़ा इतिहास रहा है। इसके अलावा जैन विश्व भारती, विश्वविद्यालय, विशाल ग्रन्थागार, धर्मोपकरण भंडार, वृद्ध साध्वर सेवा केंद्र, पारमाथिग्क शिक्षण संस्थान, समण श्रेणी यहां मौजूद है।

आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तीन खण्डों का लोकार्पण

जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित्त आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय भवन, आचार्य तुलसी महिला शिक्षा केन्द्र भवन व आचार्य महाप्रज्ञ केन्द्रीय शैक्षणिक भवन का लोकार्पण करने के पश्चात्ï आयोजित समारोह में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि ज्ञान की आराधना होनी चाहिए, ज्ञान को सर्वोपरि तत्व माना गया है। उन्होंने जैन संस्थाओं से जैन विद्या के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जैन विश्व भारती एवं उससे सम्बद्घ विश्वविद्यालय का तो कत्र्तव्य है कि वह जैन विद्या पर आवश्यक ध्यान दें। उन्होंने सभी तेरापंथ संस्थाओं को परस्पर मनोमालिन्य दूर कर मिलकर काम करने की आवश्यकता बताई तथा कहा कि तभी समाज एवं अन्य लोगों का भला हो सकता है। उन्होंने जैन विश्व भारती को कामधेनु की उपमा देते हुए कहा कि जब तक इसका दोहन नहीं हो, समाज लाभान्वित नहीं हो सकता। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा द्वारा बनाए गए आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के मुख्य भवन एवं उनसे सम्बन्धित आचार्य तुलसी महिला शिक्षा केन्द्र व आचार्य महाप्रज्ञ केन्द्रीय शैक्षणिक भवन का उद्ïघाटन आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में क्रमश: राजेन्द्र बच्छावत, श्रीमती कुमुद नवरत्नमल बच्छावत व श्रीमती मंगलीदेवी दुधेडिय़ा ने किया। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष चैनरूप चिण्डालिया नें बताया कि महासभा अपने संगठन के दायित्व को पूरा करने के साथ शिक्षा के आयाम के प्रति भी सदैव सजग रही है। आचार्य तुलसी के जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय के तीन खण्डों के भवन निर्माण का दायित्व भी निर्धारित दस महीनों के समय में महासभा ने पूर्ण किया है। उन्होंने अपने सम्बोधन में इन भवनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

मुनि महेन्द्रकुमार ने कहा कि आज शिक्षा विभिन्न आयामों में फैलती जा रही है लेकिन उसका मूल केन्द्र गायब है। आंतरिक चेतना और मानवीय मूल्यों के बिना शिक्षा कभी पूर्ण नहीं हो सकती। हमें आंतरिक चेतना का रूपान्तरण करना होगा । उन्होंने जैन विद्वानों को तैयार करने की योजना पर भी प्रकाश डालते हुए जैन दर्शन, जैन साधना व समग्र जैन संस्कृति के उद्घार के लिए आवश्यक बताया। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या डा. समणी मल्लिप्रज्ञा ने समाज में महिला विकास और महिला शिक्षा की आवश्यकता बताते हुए इस क्षेत्र में तेरापंथ धर्मसंघ की विशेष भूमिका की जानकारी दी।

जैन विश्व भारती के अध्यक्ष सुरेन्द्र चौरडिय़ा ने आचार्य महाप्रज्ञ के करीब साढ़े चार साल पूर्व प्राप्त संदेश का वाचन करते हुए जैन विश्व भारती को आचार्य तुलसी के सपने की कामधेनु बताया व जैन विश्व भारती को विश्वविद्यालय की पितृ संस्था बताया और कहा कि दोनों निरन्तर मिलकर काम कर रहे हैं।

जैन विश्व भारती की कुलपति समणी चारित्रप्रज्ञा ने इस अवसर पर कहा कि आचार्य तुलसी व आचार्य महाप्रज्ञ कभी सम्प्रदाय में बंधकर नहीं रहे। उनका चिंतन समूचे मानव समुदाय के लिए था। उसी के अनुरूप हम समाज में एक बड़े परिवर्तन का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या साध्वी ऋतुयशा ने भी संस्था के निरन्तर विकास और विभिन्न बहुआयामी कोर्स शुरू करने की आवश्यकता बताई।

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Saturday, March 5, 2011

शिक्षकों ने मांगा 19 माह का बकाया वेतन

शिक्षकों ने मांगा 19 माह का बकाया वेतन
लाडनूं। स्थानीय निजी शिक्षण संस्था के.बी. प्राथमिक विद्यालय के शिक्षाकर्मियों को करीब 19 महीनों का बकाया वेतन भुगतान नहीं किए जाने को लेकर विद्यालय के कार्मिकों ने एक सामूहिक पत्र जिला कलक्टर एस.एस.बिस्सा को जनसुनवाई चौपाल के दौरान सौंपा।
विद्यालय के कर्मचारियों प्रकाशचंद वर्मा, कमलेशकुमार गुप्ता, जवानसिंह व दीनदयाल शर्मा द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में बताया गया है कि राजकीय अनुदान प्राप्त इस शिक्षण संस्था के कर्मचारियों को जून, 2006 से मार्च, 2007 तक तथा अप्रैल, 2010 से दिसम्बर 2010 तक का वेतन भुगतान नहीं किए जाने से उन पर आर्थिक संकट गिर चुका है। परिवार के सदस्यों का पालन-पोषण तक ढ़ंग से नहीं हो पा रहा है तथा उनके भूखों मरने की नौबत तक आ चुकी।
उन्होंने बकाया 19 माह का वेतन अविलम्ब भुगतान करवाने की मांग की है। जिला कलक्टर ने इस सम्बन्ध में जिला शिक्षा अधिकारी को उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

करोड़ों का क्रिकेट सट्टा पकड़ा

करोड़ों का क्रिकेट सट्टा पकड़ा
एस.पी. के निर्देश पर कार्रवाई
लाडनूं। वल्र्ड कप किक्रेट मैचों को लेकर होने वाली करोड़ों की सौदेबाजी पर नियंत्रण के लिए पुलिस अधीक्षक डा.बीएल मीणा के निर्देश पर पुलिस ने छापा मारकर चार जनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से एक लाख 71 हजार 6 00 रूपए नकद, 45 मोबाइल, एक टीवी, कम्प्यूटर, लेपटॉप, टेपरिकॉर्डर, पांच कैसेट व लेनदेन के हिसाब की डायरी व रिकार्डिंग मशीन बरामद की है।
पुलिस उपअधीक्षक गोपाल रामावत ने बताया कि 27 फरवरी रविवार को शहर के विभिन्न क्षेत्रों में क्रिकेट मैचों को लेकर सौदे होने की जानकारी मिलने पर चार दलों का गठन किया गया। पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर एक साथ छापामार कार्रवाई की। शहर के दूसरी पट्टी स्थित एक मकान पर छापे में लाडनूं निवासी सौरभ बैद पुत्र रमेशकुमार बैद, भागचंद पुत्र गैंदाराम विश्नोई निवासी नोखा, विशु पुत्र बनवाली बंगाली निवासी गोहाटी व शिव पुत्र सियाराम दर्जी निवासी नोखा को सौदा करते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सभी आरोपियों को हिरासत में लेकर उपकरण जब्त कर लिए।
कार्रवाई करने वाली टीम का नेतृत्व जसवंतगढ़ थानाप्रभारी अमराराम विश्नोई ने किया। टीम में अयूब खां, अब्दुल शकील, ओमप्रकाश शर्मा, नवरत्नमल, संजयकुमारी, संजू व हरिराम आदि पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस की सट्टे के खिलाफ कार्रवाई से शहर में हडकंप मच गया। अनेक सटोरियों को सौदा होने से पहले ही अपने स्थान बदलने पड़ गए। पुलिस ने बताया कि अभियान जारी रहेगा। इस कार्यवाही के दिन स्थानीय थानाधिकारी अवकाश पर बाहर गए हुए थे। बताया जाता है कि कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के चलते इस जुए को पुलिस की ओर से हरी झण्डी मिली हुई थी।

Wednesday, December 9, 2009

महंगाई पर हाथ खड़े करती सरकार!

खाद्य पदार्थों के बेतहाशा महंगे होने के कारण देश के गरीब जो यंत्रणा इन दिनों झेल रहे हैं, ऎसी आजादी के बाद पिछले साठ साल में कभी नहीं देखी गई। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि दाल सौ रूपए किलो हो जाएगी और सब्जियों की कीमतें भी आसमान छूने लगेंगी। उस पर विडम्बना यह है कि आम आदमी का हितैषी होने का दम भरने वाले सत्तारू ढ़ संप्रग में एक भी नेता ऎसा नहीं है, जिसने घोर विपत्ति के इस दौर में गरीब के आंसू पोंछने वाली कोई बात कही हो।

इससे भी अधिक विस्मयकारी बात यह है कि जो लोग और पार्टियां विगत में महंगाई के खिलाफ आंदोलन करती रही हैं और खुद को दलितों व गरीबों का मसीहा बताती हैं, वे भी चुप हैं। जनता की याददाश्त कमजोर हो सकती है, लेकिन 1999 में कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में प्याज के दाम अचानक बेहद बढ़ जाने के कारण भाजपा को करारी हार झेलनी पड़ी थी। धड़ेबाजी के कारण बेहद कमजोर हो गई भाजपा ने दिल्ली की सड़कों पर महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन किए जरू र, लेकिन वह प्रतीकात्मक बनकर रह गए।

पिछले सप्ताह लोकसभा में इस मुद्दे पर हुई बहस के दौरान सदन में सदस्यों की नाममात्र की उपस्थिति से साफ हो गया कि हमारे राजनेताओं को गरीब की कितनी चिंता है। शरद पवार जब उत्तर देने के लिए खड़े हुए, तो सदन में केवल 26 सदस्य उपस्थित थे। बहस की शुरूआत करने वाले भारतीय जनता पार्टी के मुरली मनोहर जोशी और समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव भी उस समय सदन में मौजूद नहीं थे।

देश की एक अरब से अधिक आबादी में से गरीब और दलित, जो असहनीय दुख-तकलीफ झेल रहे हैं, उस पर हुई चर्चा में कृषि मंत्री शरद पवार का योगदान क्या है? उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में महंगाई का सारा दोष राज्य सरकारों के सिर मढ़ कर केन्द्र सरकार को सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया। इससे ज्यादा शर्मनाक बात कोई नहीं हो सकती। क्या महाराष्ट्र में सरकार कांग्रेस और पवार की पार्टी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी की नहीं है? क्या आन्ध्र से राजस्थान और हरियाणा तक कई अन्य राज्यों में भी कांग्रेस सत्तारू ढ़ नहीं है?

शरद पवार का केन्द्रीय खाद्य एवं कृषि मंत्री के रू प में प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। वे इस पद पर 2004 से हैं, लेकिन इस पूृरे कार्यकाल में उन्होंने मंत्री पद की जिम्मेदारी बहुत लापरवाह तरीके से निभाई है, क्योंकि उनके दिमाग में इससे भी महत्वपूर्ण कई चीजें हैं। उदाहरण के लिए, बेहद लुभावने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का नाम लिया जा सकता है। इसके अलावा एनसीपी के एकछत्र नेता पवार अपनी बेटी सुप्रिया सुले को अपना उत्तराधिकारी बनाने की कोशिश में जोर-शोर से लगे हुए हैं।

चीनी और गन्ने की कीमतों के घोटाले में पवार की निंदनीय भूमिका रही है। इसी के चलते मनमोहन सिंह सरकार को हड़बड़ी में अपना कदम वापस लेना पड़ा। राज्यसभा में विपक्ष के कुछ सांसदों ने बेलगाम महंगाई के बारे में केन्द्र सरकार की निष्क्रियता सम्बन्धी पैने और प्रासंगिक प्रश्न पूछे थे। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पूर्व में कह चुके हैं कि महंगाई को काबू में रखने के लिए युद्धस्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं।

केन्द्र सरकार के संकटमोचक की भूमिका कई बार निभा चुके प्रणव मुखर्जी भी इस बहस के दौरान आपा खो बैठे और माकपा नेता वृंदा करात को जोर-जोर से लताड़ने लगे। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि केन्द्र सरकार महंगाई पर काबू पाने के लिए क्या कदम उठा रही है। उन्होंने न जमाखोरों और न मुनाफाखोरों के बारे में कुछ कहना मुनासिब समझा और न तथाकथित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के विफल होने के बारे में कुछ कहा। हालांकि उन्होंने दावा किया कि "सरकार जो कुछ कर सकती है, वह कर रही है।" इसके बाद उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दालों की तीस लाख टन कमी के बारे में वह कुछ नहीं कर सकते। क्या इन हालात में सरकार को समय रहते योजना बनाकर कदम नहीं उठाने चाहिए थे? क्या प्रणव बाबू या शरद पवार बताएंगे कि चीनी के दाम तीन गुने कैसे हो गए, जब तीन महीने पहले ही पवार कह रहे थे कि देश में चीनी की बहुतायत है और उसमें से कुछ का निर्यात भी किया जा सकता है?

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद आज अमीर और गरीब के बीच की खाई अपूर्व है। वर्ष 1991 में शुरू हुए आर्थिक सुधारों के बाद कुछ लोगों का जीवन-स्तर तो सुधरा है, लेकिन 35 करोड़ से ज्यादा लोगों को दो जून की रोटी भी नसीब नहीं हो रही, उनके बारे में सोचने की फुर्सत लगता है सरकार में बैठे लोगों को है ही नहीं।
इसी तरह 9 प्रतिशत विकास दर भी प्रशंसनीय है, जो मंदी के इस दौर में चीन की उच्चतम विकास दर के बाद दूसरे नम्बर पर है। लेकिन मुश्किल यह है कि संप्रग सरकार मानती है कि ऊंची विकास दर से गरीब स्वाभाविक रूप से लाभान्वित होंगे, क्योंकि उसका लाभ ऊपर से नीचे तक पहुंचेगा।

गरीबी की रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वालों की तादाद भी कुछ घटी है, लेकिन इस बारे में सरकारी आंकड़े दोषपूर्ण हैं, जिसमें मूल्य सूचकांक से खाद्य पदार्थों को बाहर रखा गया है।

यदि एक डॉलर प्रतिदिन आय को गरीबी रेखा का पैमाना माना जाए, तो गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर करने वालों की तादाद कहीं ज्यादा होगी। आज खाद्य पदार्थों की कीमतें जिस स्तर पर हैं, उनका फिलहाल नीचे आना संभव नहीं लगता, जिसकी वजह से गरीबी रेखा से ऊपर के लोगों को भी मुश्किलें हो रही हैं। आज तो मध्यम वर्ग के भी अनेक परिवार ऎसे हैं, जो दाल-सब्जियां खरीदने की हैसियत में नहीं रहे। उभरते भारत के लिए इससे शर्मनाक बात और क्या हो सकती है?